KULGEET
||कुलगीत ||
बुद्ध की धरती तुझे प्रणाम |-२
ऋषि मुनियों का रहा जहाँ पड़ाव |
ज्ञान और कौशल को देती नित्य नए आयाम |
बुद्ध की धरती तुझे प्रणाम |-२
कुशावती,गोरक्ष आदि का रहता जहाँ जुड़ाव |
किया तथागत ने आकर के जहाँ पवित्र पड़ाव |
दिव्य ज्ञान से है अभिसिंचित सुकरौली आवाम |
बुद्ध की धरती तुझे प्रणाम |-२
इस धरती पर विद्वानों ने ज्ञान का अलख जगाया |
हिंसा का परित्याग बताकर शांति का पाठ पढाया |
ऐसा वर दे दो परमेश्वर पायें नया मुकाम |
बुद्ध की धरती तुझे प्रणाम |-२
विद्या और बुद्धि का हर पल फैले यहाँ प्रकाश |
सभी क्षेत्र में यहाँ चतुर्दिक दिखने लगा विकास |
बने सदा कर्तव्यनिष्ठ हम,करते रहें सुकाम |
बुद्ध की धरती तुझे प्रणाम |
बुद्ध की धरती तुझे प्रणाम |
-रचयिता- डॉ ० कौशल किशोर तिवारी